Tuesday, December 28, 2010

कंपनियों से प्रॉफिट का ब्योरा लेगी सरकार

भारत सरकार ने 100 से अधिक कंपनियों को अनिवार्य तौर पर कॉस्ट ऑडिट कराने का आदेश दिया है। किसी कंपनी की उत्पादन लागत और प्रॉफिट मार्जिन के सरकारी निरीक्षण की व्यवस्था को कॉस्ट ऑडिट कहा जाता है। अभी तक इसका दायरा सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और सर्विसेज जैसे सेक्टरों से जुड़े 44 उत्पादों तक सीमित, ज़ो अब बढ़ा दिया गया है।

सरकार के इस कदम का मकसद यह जानना है कि ये कंपनियां पैसे का कितने सही तरीके से इस्तेमाल करती हैं। यह कदम इस लिहाज से भी अहम है कि अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए कंपनियों की ओर से वसूले जा रहे दाम को लेकर सरकार कुछ असहज महसूस कर रही है।

विभाग ने कंपनी कानून की धारा 233 बी के तहत आदेश जारी किया है। इस धारा के तहत सरकार कंपनियों से जरूरी पड़ने पर ऑडिट की मांग कर सकती है। कॉस्ट ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए जाने पर सरकार कंपनी रजिस्ट्रार से किसी भी कंपनी के खातों की जांच करने को कह सकती है।

कॉस्ट ऑडिट रिपोर्ट में सामग्री, यूटिलिटीज, कर्मचारियों पर खर्च, डेप्रिसिएशन, रॉयल्टी, शोध पर खर्च, निर्यात बोनस, कर्ज की लागत और कंपनी के आंतरिक लेनदेन की विस्तृत जानकारी को शामिल किया जाता है।

इन आंकड़ों की मदद से कंपनियां अपनी क्षमता में सुधार कर पाती हैं और वहीं इससे सरकार को अपनी नीतियों को आकार देने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों के एक समूह ने 50 करोड़ रुपए से अधिक कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को अनिवार्य तौर कॉस्ट ऑडिट खाता रखने का सुझाव दिया है। इस समय पेपर, चीनी सहित 44 उत्पादों से जुड़ी कंपनियों को ही इस दायरे में लाया गया है।

सौजन्य: ET

Saturday, December 18, 2010

पेन ड्राइव को बनाएँ कंप्यूटर की रैम

किसी भी कंप्यूटर की कार्य क्षमता में उसकी 'मेमोरी' (रैम) बहुत महत्वपूर्ण होती है। पर दिक्कत यह आती है कि एक तो कंप्यूटर की रैम बहुत महंगी होती है और दूसरा इसे कंप्यूटर खोलकर फिट करना पड़ता है। ऐसे में रैम का 'अपग्रेडेशन' झंझट वाला काम लगता है। इसका हल, 'राजीव शर्मा' वेबदुनिया पर बताते हैं।

आजकल कुछ ऐसे खास सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जिनकी मदद से पेन ड्राइव का इस्तेमाल करके आप अपने कंप्यूटर की कार्य क्षमता में आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ोतरी कर सकते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज विस्टा व विंडोज-7 की 'रेडीबुस्ट' तकनीक के अलावा अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए 'ईबुस्टर' जैसे सॉफ्टवेयर पेन ड्राइव के जरिए कंप्यूटर को नई गति देने का काम कर रहे हैं। इनकी सहायता से बार-बार इस्तेमाल होने वाली फाइल, एप्लीकेशन या प्रोग्राम अपेक्षाकृत ज्यादा तेजी से चलाए जा सकते हैं।

इस तकनीक से जुड़े सॉफ्टवेयर इस बात का ध्यान रखते हैं कि आप किस प्रोग्राम को ज्यादा चलाते हैं। इन्हें वे मेमेरी या 'वर्चुअल मेमेरी' के एक भाग में 'रिजर्व' करके रख लेते हैं। फिर जब भी आप उसके लिए कमांड देते हैं तो वे सीधे इस मेमोरी से ही चलते हैं। इससे कंप्यूटर के काम करने की गति तेज हो जाती है। यही वजह है कि अधिक मेमोरी होने से कंप्यूटर की गति तेज लगती है। इस तकनीक से कंप्यूटर के 'बूट' (स्टार्ट) होने की गति भी पहले की तुलना बढ़ जाती है।

सौजन्य: वेबदुनिया

नौकरी के साथ, नौकर फ्री!

गूगल ने घोषणा की है कि‍ वो अपने कर्मचारि‍यों को कंपनी की ओर से घरेलू नौकर की सुवि‍धा देगी ताकि‍ वो अपने काम पर और ज्‍यादा ध्‍यान दे सकें।

इस काम के लि‍ए गूगल ने टास्‍करेबि‍ट नाम की कंपनी से अनुबंध कि‍या है जो यूजर्स को ऐसे ऑनलाइन जॉब बोर्ड पर एक्‍सेस देती है जहाँ से वो कि‍सी भी काम के लि‍ए नौकरों को भाड़े पर बुला सकते हैं।

दरअसल मंदी के दौर से उबरने और अपने स्‍टाफ में भारी कटौती करने के एक अर्से बाद गूगल प्रतिभाशाली इंजीनि‍यर्स को अपने साथ काम करने के लि‍ए आकर्षि‍त करना चाहती है। और जाहि‍र सी बात है कि‍ ऐसे टेलेंटेड इंजीनि‍यर्स, लॉन्‍ड्री में कपड़े देने या कार धोने जैसे कामों पर अपना बहुमूल्‍य समय नष्‍ट नहीं करना चाहेंगे।

सौजन्य: वेबदुनिया

Friday, December 17, 2010

'हिंदू अतिवादी समूह सबसे बड़ा ख़तरा: राहुल गांधी'

इस बार विकिलीक्स एक बड़े भारतीय राजनयिक, राहुल गांधी, पर निशाना साधते हुए कहा है की गत वर्ष, उन्होने एक अमेरिकी राजदूत, टिमती रोमर, को हिंदू अतिवादी समूह से बढ़ते हुए ख़तरे के बारे में चेताया था. भारत में बढ़ते आतंकवादी हमलों के उपर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होने ये बात कही थी. कांग्रेस नेता राजनीतिक विषयों, सामाजिक चुनौतियों और अगले पांच वर्षों में कांग्रेस पार्टी के लिए चुनावी मुद्दों पर रोमर के साथ अपने विचार साझा कर रहे थे.

सौजन्य: हिंदू

Thursday, December 16, 2010

अब आ गया टाइम, शेयर्ड कम्प्यूटिंग का!

शेयर्ड कम्प्यूटिंग को `डेस्कटॉप वर्चुअलाइजेशन' भी कहते हैं। इस तकनीक से एक मुख्य कम्प्यूटर में कुछ विशेष हार्डवेयर और सॉप्टवेयर डालकर डिवाइस की मदद से कई क्लाइंट कम्प्यूटर जोड़े जाते हैं। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें विंडोज और अन्य एप्लीकेशन केवल सर्वर कम्प्यूटर पर लोड करने पड़ते हैं और क्लाइंट कम्प्यूटर के रूप में केवल डेस्कटॉप, माउस और की-बोर्ड की जरूरत होती है। इसके बाद एक सीपीयू से करीब तीस लोग काम कर सकते हैं और वे सभी एप्लीकेशन भी एक्सेस कर सकते हैं जो सर्वर कम्प्यूटर पर लोड हैं। यह तकनीक स्कूलों, अस्पतालों, निजी या सरकारी संगठनों और कार्यालयों के लिए बहुत लाभदायक और सस्ती पड़ती है, जहां कई कम्प्यूटरों का प्रयोग होता है।

एन-कम्प्यूटिंग नामक एक अमेरिकी कंपनी, अब तक शेयर्ड कम्प्यूटिंग तकनीक से दुनियाभर के 40 हजार स्कूलों और संस्थानों में कम्प्यूटर लगा चुकी है। इसके साथ ही कंपनी ने भारत में बिहार सरकार के साथ करार कर शेयर्ड कम्प्यूटिंग तकनीक की मदद से सैकड़ों स्कूलों में कम्प्यूटर स्थापित करने की योजना बनाई है। आंध्रप्रदेश और राजस्थान में भी कंपनी ने सरकार के साथ मिलकर कम्प्यूटर शिक्षा की पहल की है।

सौजन्य: इलेक्ट्रोनिकी