आज आपका परिचय एक नए अंग्रेजी शब्द से करवाता हूँ, "Geo-Informatics" ...
दरअसल, आजकल यही शब्द मेरे जीविका का आधार बना हुआ है। हिन्दी-भाषी इस शब्द को "भूगोल" से जोर कर देख सकते हैं। सूचना-क्रांति के इस युग मैं भला "भूगोल" भी कब तक कंप्यूटर से दूर रह पता... बस जैसे ही ये दोनों मिले, "Geo-Informatics" अस्तित्व में आ गया। अब आप सोच रहे होंगे भला एक आम आदमी का इससे क्या नाता?
१) हमारे संयुक्त परिवार में जमीन को लेकर विवाद तो आम बात होगी। क्या कुछ नही करते हम, कभी सीमा पर बाबुल का तो नीम का पेर लाग देते हैं, कभी कंटीले तार, और पता नही क्या-क्या लेकिन फ़िर भी लाठियां तो चल ही जाती है। लेकिन तकनीक के पंचायत में न्याय की पूरी गारंटी है। अगर हमारी सरकार ने इस तकनीक को अपनाया तो यकीन मानिये के इंच की भी गलती की गुन्जयास नही होगी। क्यूँ, चौंक गए न?
२) यूँ तो आपको यह सन्दर्भ मजाकिया लगेगा लेकिन ज़रा सोचिये अगर ये तकनीक सस्ती और सुलभ हो जाए जैसे की आज हर हाथ मैं मौबाइअल है, तो इस तकनीक की मदद से आप अपने मवेशी पर नज़र रख पाएंगे की वो अपनी सीमा के अन्दर हैं या बाहर। न सिर्फ़ जानवर बल्कि आप अपने घर के नन्हे शैतानों पर भी नज़र रख पायेंगे।
३) घर मैं अगर दादा जी बीमार हैं और मज़बूरी है की घर के सभी शख्स नौकरी-शुदा हैं, तो परेशान होने की कोई जरुरत नही, ये तकनीक दादा जी के स्वस्थ के बारे मैं आपको पल-पल सूचित करती रहेगी।
ऐसा नही है की सूचि बस तीन तक की गिनती मैं ही सिमट चुकी है। यकीन मानिये, ये बस कुछ बहुत ही सामान्य से उदाहरण हैं, सामान्य शब्दों में इस नै तकनीक के बारे मैं आपको जानकारी देने की। विकशित देशों मैं इसे ही 4-G कहा जा रहा है। यानी की आपके मौबाइअल का अगला पराव।
Monday, December 14, 2009
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