Friday, November 7, 2008

कुंबले अब तो सबने मान लिया, सिर्फ़ नाम ही काफ़ी है

आज सुबह अख़बार मैं पढ़ा की भारतीय क्रिकेट जगत के भगवन माने जाने वाले सचिन के कमेंट्स जो शायद दिरेक्ट दिल से कहे गए थे। दर असल, सचिन जिस युग का प्रतिनिधितव्य करते हैं, अब उस युग के अकेले योधा मैदान मैं हैं और कहीं न कहीं ये बात उनके दिल को भी कचोट रही है की उनके कैरीयर का अंत भी अब ज्यादा दूर नही है। इसलिए ये बातें लाजिमी हैं की अंत समय मैं सफर के सभी साथी याद आयें। लेकिन, ये क्या मैं कहना से कुंबले के बारे मैं चाह रहा था और बातें सचिन की किए जा रहा हूँ। असल मैं सचिन होने का मतलब ही यही होता है की क्रिकेट की कोई भी बात उनके नाम के बिना पुरी ही नही होती तो, फ़िर कुंबले होने का मतलब क्या है?

कुंबले का मतलब होता है वो जज्बा जो टूटे हुए जबरे के साथ भी मैदान मैं बैखोफ उतरे और मैच का रुख मौर दे, यह वो जज्बा है की अकेले ही सभी दस विकेट अपने बूते उखर दे, ये वो जज्बा है की लगातार अठारह साल तक अपने को साबित करता आया है लेकिन दुःख भी होता है ये सुनकर जब क्रिकेट के जानकर उन्हें उनकी असल पहचान देने से हिचकते हैं और वो पहचान है फिरकी गेंदबाज़ कहलाना। हालाँकि आंकरों के हिसाब से तो उन्होंने वार्ने और मुरलीधरन के बाद अपनी जगह पक्की कर ही ली है।

इस तरह मैं तो ये जरुर कहूँगा की कुंबले ने क्रिकेट को अलविदा कहते हुए ये कहने की मजबूर कर ही दिया है की भैया तुम पसंद करो या न करो लेकिन फिरकी जगत मैं अब ये नाम ही काफ़ी है। उन्होंने एक बड़ी ही अनूठी परिकल्पना स्थापित की है की आज का दौर सिर्फ़ प्रतिभा का दौर नही बल्कि आपकी प्रतिबधता और सतत लगन परिश्रम से मुकाम हासिल करने का दौर है। तभी तो लॉर्ड्स जैसे मैदान पर जाकर यह खिलारी शतक भी जमा आता है, जहाँ बड़े-बड़े बल्लेबाज़ पस्त हो चुके होते हैं। शायद, कुंबले बाद अब सहवाग एक ऐसा खिलारी है जो कुंबले के बाद इस परिकल्पना को आगे बढ़ाने का माद्दा रखते हैं। क्यूंकि गौरतलब हो तकनिकी रूप से वो भी पूर्ण बल्लेबाज़ नही माने जाते।

कुंबले ख़ुद एक इंजिनियर हैं और एक और बात उन्होंने पूरी सफलता के साथ स्थापित की है की एक प्रतिभाशाली दिमाग हमेशा अपने लिए कुछ अलग पहचान बना ही लेते है। भले ही कुंबले इंजिनियर का दिमाग सामान्य इंजिनियर की तरह न किया हो लेकिन मैदान पर इसने बलेबाजों को अपनी बुद्धिमता का लौह जरुर मनवाया। मुझे नही मालुम की उन्होंने अपने आगे के भविष्य के लिए क्या योजनायें बना रखे हैं। लेकिन इतना यकीन है की ये योधा किसी भी क्षेत्र मैं अपनी एक अलग पहचान बनाने का माद्दा जरुर रखता है। इसमें कोई बड़ी बात नही की कल ये फ़िर अपने मूल क्षेत्र यानी की विज्ञानं और तकनीक मैं कुछ कमाल कर जाए। कुंबले को उनके सुनहरे भविष्य की बहुत सारी शुभकामनाएँ।