Tuesday, December 14, 2010

कुछ पंक्तियाँ इधर-उधर की....

जमीन की बात करो, जिंदगी की बात करो !
जो सबके वास्ते हो, उस ख़ुशी की बात करो !!


मै कब से कितना हूँ तन्हा, तुझे पता भी नहीं !
तेरा तो कोई खुदा है, मेरा खुदा भी नहीं !!



Coutesy: Anonymous
 

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